उत्तराखण्डदेहरादून

सहायक अध्यापक एलटी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी हुए तीन माह का समय बीता, 200 से ज्यादा अतिथि शिक्षकों को नहीं किया जा सका समायोजित

Ad

देहरादून: उत्तराखंड में सहायक अध्यापक एलटी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी हुए तीन महीने से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अब तक 200 से अधिक अतिथि शिक्षकों को समायोजित नहीं किया जा सका है। कला, व्यायाम, हिंदी सहित विभिन्न विषयों के  शिक्षक गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। नौकरी से हटाए जाने के बाद कई शिक्षकों के सामने रोज़ की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।

Ad

सहायक अध्यापक एलटी शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से दावा किया गया था कि किसी भी अतिथि शिक्षक को प्रभावित नहीं किया जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट सामने आई है। वर्ष 2015 से प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में सेवाएं दे रहे गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई अतिथि शिक्षक इस भर्ती प्रक्रिया के बाद प्रभावित हुए हैं और उन्हें विद्यालयों से बाहर कर दिया गया है।

सेवा के बदले में मिली बेरोज़गारी

प्रभावित अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक दुर्गम इलाकों में सेवाएं देने के बावजूद आज उन्हें बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल से हटाए जाने के बाद न केवल आर्थिक संकट बढ़ गया है, बल्कि  मानसिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ रहा है।

नई भर्ती में शामिल होने की उम्मीद खत्म

ज्यादातर अतिथि शिक्षक विभाग में 10 वर्षों से अधिक सेवा दे चुके हैं, लेकिन अब वे नियमित शिक्षक बनने की अधिकतम आयु सीमा भी पार कर चुके हैं। ऐसे में उनके सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नई भर्ती में शामिल होने का विकल्प भी अब उनके लिए बंद हो चुका है।

सरकारी नीतियों पर उठे सवाल

यह भी पढ़ें 👉  छोटा कैलाश मन्दिर में शिवरात्रि मेले को भव्य रूप देने की तैयारी, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल ने सर्किट हाउस में की बैठक, अधिकारियों को दिये निर्देश

अतिथि शिक्षकों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जहां एक ओर दैनिक वेतन, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जा रहा है और समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है, वहीं अतिथि शिक्षकों के लिए अब तक कोई स्थायी और सुरक्षित नीति नहीं बनाई गई।

वर्षों की सेवा के बाद नजरअंदाज करना शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय

प्रभावित शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जाना चाहिए जहां छात्र संख्या अधिक है और शिक्षकों की भारी कमी है। उनका कहना है कि अनुभव, योग्यता और वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें नजरअंदाज करना शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

यह भी पढ़ें 👉