राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर विशेष: मिर्गी रोग एक मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी, शुरुआती दौर में इस रोग का उपचार संभव


हल्द्वानी:- आज राष्ट्रीय मिर्गी दिवस है, यह हर वर्ष 17 नवंबर को मनाया जाता है, इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को मिर्गी रोग के प्रति जागरूक करना है।

इस बारे में हमने अग्रवाल न्यूरो सेंटर रामपुर रोड हल्द्वानी के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ रजत अग्रवाल से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह एक मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है, इसमें असामान्य तरीके से बार-बार दौरे पड़ने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी अब लाइलाज नहीं है। शुरुआती दौर में यदि इसका उपचार कराया जाए तो मरीज के ठीक होने की संभावना अधिक रहती है।
मिर्गी के लक्षण के प्रकार :
● मुंह से झाग आना।
● चेहरा या हाथ पैरों का टेढ़ा होना।
● मांसपेशियों में ऐंठन का होना।
● अनियंत्रित झटके।
● खाली निगाहों से देखना।
● मांसपेशियों का नियंत्रण खोना।
● असामान्य गंध या स्वाद का अनुभव
मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज को आराम से बिस्तर या जमीन पर लिटाकर कपड़े ढीले कर दें।
मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या न करें:
■ पूरी तरह सजग होने से पहले उन्हें खाना या पानी न दें।
■ दम घुटने से बचने के लिये उनके मुंह में हाथ या चम्मच न डालें।
■ पीड़ित व्यक्ति के आस-पास भीड़ न लगायें।
■ मुँह में पानी या खाना बिल्कुल न डालें।
■ भिंचे हुए जबड़ों को बलपूर्वक खोलने का प्रयास बिल्कुल न करें।
मिर्गी रोग के उपचार:
डॉ रजत अग्रवाल के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत लोगों में दवाएं मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं, बशर्ते कि यह दवाएं चिकित्सक के बताएं निर्देशानुसार नियमित रूप से ली जाएं।
डॉ रजत अग्रवाल के अनुसार किसी को भी के इस तरह से लक्षण यदि दिखाई देते हैं तो मरीज के परिजनों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है और कुशल न्यूरोफिजिशियन से सलाह लेकर ही उपचार कराना बेहतर होता है।
चिकित्सक की सलाह के अनुसार मेडिटेशन, योग, एक्सरसाइज आदि अन्य उपचारों पर भी विचार किया जा सकता है।
महत्वपूर्णः मिर्गी के किसी भी लक्षण के लिए, तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति 5 मिनट से अधिक समय तक दौरे का अनुभव करता है, तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें।










