चित्राशिला घाट में विशाल स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान चलाया, रैली के माध्यम से स्वच्छता का दिया संदेश


आज 23 मार्च को जिला गंगा समिति, नैनीताल; गौला रेंज, तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी; नगर निगम, एवं स्थानीय जनसमुदाय के संयुक्त तत्वाधान में चित्रशिला घाट, काठगोदाम में एक विशाल स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम 16 से 31 मार्च, 2026 तक संचालित “गंगा स्वच्छता पखवाड़ा” के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी/अध्यक्ष, जिला गंगा समिति, नैनीताल के आदेशानुसार तथा सदस्य संयोजक /प्रभागीय वनाधिकारी/तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी के कुशल निर्देशन एवं जिला परियोजना अधिकारी, जिला गंगा समिति, नैनीताल के सौजन्य से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित जागरूकता रैली के साथ हुई। रैली के माध्यम से आमजन को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोत केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं, जिनकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रतिभागियों द्वारा चित्रशिला घाट क्षेत्र के प्रत्येक हिस्से में सफाई करते हुए लोगों को प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट को निर्धारित कूड़ेदानों में ही डालने तथा “कम उपयोग-पुनः उपयोग-पुनर्चक्रण (Reduce, Reuse, Recycle)” की जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके उपरांत मुख्य घाट पर सघन सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 5 टन ठोस अपशिष्ट एकत्रित किया गया। एकत्रित कचरे को नगर निगम, हल्द्वानी द्वारा गौला पार स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप निस्तारण हेतु भेजा गया। इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि सामूहिक प्रयासों से न केवल प्रदूषण को कम किया जा सकता है, बल्कि पारिस्थिति की तंत्र के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम भी उठाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को “गंगा स्वच्छता शपथ” दिलाई गई, जिसमें सभी ने गंगा एवं इसकी सहायक नदियों को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने, जल स्रोतों में कचरा न डालने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में आचरण करने का संकल्प लिया।
समापन अवसर पर आयोजित सूक्ष्म जलपान के दौरान भी प्रतिभागियों ने अनुकरणीय व्यवहार प्रस्तुत करते हुए उत्पन्न कचरे को पृथक रूप से एकत्रित कर स्वच्छता का संदेश दिया।
इस अभियान में लगभग 150 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए यह सिद्ध किया कि जनसहभागिता ही पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी शक्ति है। यह पहल न केवल गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का भी सशक्त माध्यम है।










