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उत्तराखण्डनैनीताल

अपने दांतों की सुरक्षा के प्रति रहें जागरूक: दांतों में खराबी के लक्षण, समस्याएं और उपचार के बारे में विशेष जानकारी

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हल्द्वानी:- हमारे शरीर में दांतों का विशेष महत्व है, सुबह उठते ही सबसे पहले टूथपेस्ट करना हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। ऐसे में यदि हमारे दांत से ठीक होंगे तो हमारा शरीर भी ठीक रहेगा, मतलब मुख का स्वास्थ्य ही सम्पूर्ण स्वास्थ्य का सूचक है।

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आज हमने दांतों की सुरक्षा और उससे जुड़ी समस्याओं को लेकर भोटियापड़ाव टैक्सी स्टैंड के सामने स्थित विजय डेंटल हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. रीमा अग्रवाल से विस्तार से बातचीत की उन्होंने दांतों से संबंधित रोग और उनकी सुरक्षा कैसे करें इस बारे में जानकारी दी।

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1. दांतों की सड़न

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हमारे दांत कैल्शियम, फॉस्फोरस और अन्य खनिज से मिलजुलकर बने होते है। हालाकि इंसानी शरीर का सबसे कठोर भाग उसके दांत ही होते है परन्तु लापरवाही और awarene न होने की वजह से यह  सड़न का शिकार हो जाते हैं।

दांतों की सड़न की वजह से उनमें दर्द होता है और खाना खाने में तकलीफ होती है, सामने के दांत सड़ जाएँ तो मुख की सुन्दरता में दाग लग जाता है और आत्मविश्वाश में कमी आती है।

2. दांतों की सड़न का कारण

दांतों की सड़न एक बहुत ही आम समस्या है परन्तु यह हमरे मुंह के अन्दर होती है और किसी को दिखती नहीं इसलिए हम कई बार इसे नजर अंदाज करते जाते है।

खान पान

वह खाद्य प्रदार्थ जिनमे कार्बोहायड्रेट और शक्कर की मात्रा अधिक हो उससे दांतों की सड़न होने का खतरा ज्यादा रहता है, अगर खाद्य प्रदार्थ चिपचिपा हो जैसे की टॉफ़ी, मिठाई, पोटैटो चिप्स तो फिर सड़न का खतरा और भी ज्यादा रहता है।
दांतों की सफाई और उनकी बनावट दांतों की ठीक तरह से सफाई न करना सड़न को न्योता देने जैसा है। रोजाना दांतों को दो वक्त साफ़ करना जरुरी है। इस तरह से आप मुंह मे मौजूद बैक्टीरिया की बढ़त को कम कर सकते है और साथ ही फंसे हुए खाद्य प्रदार्थ को भी साफ़ कर सकते हैं। दांतों को साफ़ रखने के लिए आपको सही तरीके से ब्रश करना, फ्लॉस करना और माउथवाश का प्रयोग करना चाहिए।

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मुख में मौजूद बैक्टीरिया कोई कितनी भी सफाई करें हर किसी के मुंह में बैक्टीरिया होते हैं। परन्तु हम अपने मुख की सफाई कितनी अच्छी तरह से करते है यह तय करता है की बैक्टीरिया की तादात बढेगी या कम होगी।

जैसे ही आप खाना बंद करते है बैक्टीरिया अपना काम शुरू कर देता है, वो दांतों पर एक तरह की सफ़ेद परत बनाता है जिसे हम प्लाक कहते हैं। यही प्लाक बैक्टीरिया का घर होता है

दांतों के सड़न के लक्षण

दांतों की सड़न का पहला लक्षण है दांत की उपरी सतह ( इनेमल) पर भूरा दाग जैसा लगना। फिर यह दाग थोडा बड़ा होता है एक छेद का रूप लेता है और उस जगह पर खाना फंसना शुरू हो जाता है। खाना फंसने से सड़न की प्रक्रिया तेज हो जाती है और दांत का छेद बड़ा हो जाता है। जब येह छेद थोड़ा गहरा हो जाता है और अंदरूनी सतह में पहुंच जाता है तब हमें ठंडे या मीठे से कनकनाहट होने लगती है। जब सड़न इससे भी ज्यादा अन्दर चला जाता है तब वह पल्प (दांतों की नस) तक पहुँच जाता है और इसे संक्रमित कर देता है, और तब हमें दांतों में जोरदार दर्द होता है।

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दांतों की सड़न से बचाव

हर 6 महीने में अपने दन्त चिकिसक (Dentist) से अपने दांतों का चेकअप कराएँ।

सुबह जल्दी उठें और अपने नित्य कर्म के लिए समय निकालें, आईने के सामने खड़े हो कर ब्रश करें ताकि आप देख सके दांतों की सफाई सही से हो रही है या नहीं।

रोजाना 2 बार सुबह और शाम को दांतों को अच्छी तरह साफ करें।

ब्रश ज्यादा जोर से न रगड़ें और 2 मिनट से ज्यादा न करें। ब्रश करने का सही तरीका सीखें।

माउथवाश का प्रयोग करें।

रात को सोने से पहले एक बार दांतों के बीच में फ्लॉस (floss) से सफाई करें।

मीठा और चिपचिपा प्रदार्थ कम खाएं।

अगर आपके दांतों में सड़न हो ही गयी है तो सबसे पहले आप अपने दन्त चिकित्सक (Dentist) से मिलें, उन्हें अपनी समस्या विस्तार से बताएं।

अगर सड़न छोटी है और दांतों की उपरी सतह पर है तो आपके दन्त चिकित्सक उसे साफ़ करके उस छेद में फिलिंग करेंगे। यह फिलिंग दांत के रंग की होती है और मेटालिक भी हो सकती है, येह आपका चुनाव पर निर्भर रहेगा।

अगर सड़न के कारण दांत का बड़ा हिस्सा खराब हो गया है  तो तो डेंटिस्ट पहले दांतों का का x-ray लेगा फिर आपको इलाज़ के बारे में बताएगा।

ज्यादातर बहुत ज्यादा सड़े हुए दांतों को दांतों को रूट कैनाल थेरेपी ( दांतों के नस का इलाज) द्वारा बचाया जाता है फिर उस पर एक कैप लगा दी जाती है।

बहुत ही ज्यादा ख़राब और पूरी तरह सड़ चुके दांतों को निकाल कर उस जगह पर कृत्रिम फिक्स दांत (Dental Implants) भी लगाया जा सकता है।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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