सातताल के जंगल में सैलानियों की आवाजाही पर रोक, वन विभाग की टीमें कर रहीं गश्त, संदिग्ध वन्यजीव को पकड़ने के लिए लगाए पिंजरे


नैनीताल: भीमताल क्षेत्र में जूनस्टेट स्थित जंगल में महिला की हत्या के बाद दहशत का माहौल है। घटना के बाद वन विभाग ने सातताल के जंगल की ओर सैलानियों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। संदिग्ध आदमखोर वन्यजीव अब तक पकड़ में नहीं आया है, जिससे आसपास के इलाकों में भय का माहौल है।

वन विभाग की टीमें लगातार दिन-रात गश्त कर रही हैं। संदिग्ध वन्यजीव को पकड़ने के लिए कई स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं और ट्रैप कैमरों से निगरानी की जा रही है। दो विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मौके पर तैनात है, जो वन्यजीव को ट्रैक्यूलाइज (बेहोश) करने की तैयारी में है।
हालांकि, अब तक वन्यजीव की सटीक मूवमेंट का पता नहीं चल सका है, जिसके चलते ऑपरेशन में सफलता नहीं मिल पाई है। विभाग का कहना है कि सुरक्षा को देखते हुए जंगल के संवेदनशील हिस्सों में आम लोगों की आवाजाही फिलहाल प्रतिबंधित रहेगी।
रेंजर बोले- वन्यजीव को पकड़ने के लिए चलाया जा रहा अभियान
रेंजर विजय मेलकानी और डिप्टी रेंजर किशन भगत ने बताया कि वन्यजीव को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। वन कर्मी दिन और रात दोनों समय जंगल क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। इस अभियान में जीवन रजवार, दीपक बिष्ट, मदन समेत कई कर्मचारी जुटे हुए हैं।
धारी और ओखलकांडा क्षेत्र के गाँवों में भी तेंदुए की दहशत
इधर धारी, धानाचूली, पहाड़पानी, चौरलेख, जाड़ापानी और ओखलकांडा क्षेत्र के गांवों में भी तेंदुए की दहशत बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार धारी और ओखलकांडा में तेंदुआ अब तक तीन महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से त्वरित और ठोस कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक तेंदुए को पकड़ा या काबू नहीं किया जाता, तब तक गांवों में भय का माहौल बना रहेगा।
पर्यटकों से अपील: प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएं
वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएं और अकेले जंगल की ओर जाने से बचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को देने को कहा है। अब सबकी निगाहें वन विभाग के अभियान पर टिकी हैं कि कब तक ‘आदमखोर’ वन्यजीव को पकड़ा जा सकेगा।










