हृदय रोग और आधुनिक जीवन शैली: “आयुर्वेद परंपरा नहीं, विज्ञान” आयुर्वेदिक औषधियां दिल के रोगों के लिए लाभकारी


हल्द्वानी:- “क्या आप जानते हैं कि आपका कुकिंग ऑयल और जिम में की गई ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत आपके दिल के लिए बहुत ही घातक हो सकती है?

शहर के मुखानी, शिव मंदिर के पास स्थित श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक नाड़ी वैद्य डॉ राहुल गुप्ता के अनुसार, हृदय रोगों का उपचार केवल दवाओं में नहीं, बल्कि सही आहार और ‘त्रिमर्म’ जैसे सिद्धांतों में छिपा है। आयुर्वेद की ‘रस औषधियाँ’ आपातकाल में भी कैसे लाभकारी हैं। आयुर्वेद अब केवल परंपरा नहीं, विज्ञान है।

आज का आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि evidence पर आधारित है। ICMR के शोधों ने यह सिद्ध किया है कि ‘पुष्करमूल’ जैसी औषधियाँ हृदय की मांसपेशियों की पंपिंग क्षमता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती हैं। वहीं ‘गुग्गुल’ हृदय की धमनियों में जमाव को साफ करने में बहुत प्रभावी पाया गया है। आयुर्वेद में कई जटिल रोगों का सफल प्रबंधन संभव है, जैसे: उच्च रक्तचाप, एंजाइना, हार्ट ब्लॉकेज, दिल की तेज धड़कन इत्यादि।
इमरजेंसी में आयुर्वेद की गति
अक्सर लोग सोचते हैं कि आयुर्वेद धीरे काम करता है, लेकिन आयुर्वेद की ‘रस औषधियाँ’ जीभ के नीचे (Sublingual) रखने पर एक सेकंड के आठवें हिस्से से भी कम समय में अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। वैद्य राहुल गुप्ता ने ‘त्रिमर्म’ सिद्धांत के जरिए ऐसे कई हृदय रोगियों की चिकित्सा की है जहाँ अन्य चिकित्सा पद्धतियाँ संघर्ष कर रही थीं।
आहार’ और हार्ट अटैक का संबंध
अक्सर हार्ट अटैक आने से ठीक पहले के भोजन पर कोई ध्यान नहीं देता। हमारा पेट हृदय के ठीक नीचे स्थित है। गर्मी के मौसम में विशेषकर उत्तर भारतीय राज्यों में मछली का सेवन, इसके अलावा पनीर के साथ पालक का सेवन इत्यादि अनेक कॉम्बिनेशन है जो खाने के तुरंत बाद, पेट में सूजन पैदा कर सीधे हृदय पर दबाव डालते है, जो कुछ ही समय में हार्ट अटैक में परिवर्तित हो सकता है। आयुर्वेद में पेट के रोग “विदग्धाजीर्ण” के लक्षण हार्ट अटैक से बहुत मिलते-जुलते बताए गए हैं। इसलिए, आहार की उचित समझ आपको हृदय रोग से बचा सकती है।
कुकिंग ऑयल और हृदय रोग का सम्बंध
आधुनिकता के चलते लोग अब रिफाइंड तेल इत्यादि पर शिफ्ट हो गए हैं। रिफाइंड तेल हृदय की धमनियों में रूखापन बढ़ाता है। शरीर में हृदय की नसों को लचीला बने रहने के लिए प्राकृतिक चिकनाई चाहिए। रिफाइंड तेल के अधिक प्रयोग से नसें सख्त और मोटी हो जाती हैं, जिसे ‘आर्टेरियोस्क्लेरोसिस’ कहते हैं। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा आज कल प्रयोग में लाए जाने वाले ऑलिव ऑयल इत्यादि भी हीट स्टेबल न होने के कारण हृदय के लिए लाभकारी नहीं होते। इसीलिए, भोजन में कच्ची घानी सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल का तेल और शुद्ध गाय का घी का प्रयोग ही सर्वश्रेष्ठ है।
जिम और वर्कआउट: अति सर्वत्र वर्जयेत
आयुर्वेद में व्यायाम का स्पष्ट नियम कहता है कि अपनी शक्ति से आधा किया व्यायाम ही लाभकारी है। गर्मी और बारिश के मौसम में, जब हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से कमजोर और थका हुआ रहता है, तब भारी वर्कआउट या ओवर-एक्सरसाइज हृदय पर अत्यधिक दबाव डालती है। लोग अक्सर मौसम और अपनी शारीरिक क्षमता/बल को नजरअंदाज कर ‘एग्जर्शन’ (Exertion) करते हैं, जो हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है। व्यायाम उतना ही करें जिससे शरीर में हल्कापन आए, न कि इतनी थकान कि हृदय की धड़कन अनियंत्रित हो जाए।
हृदय को सुरक्षित रखने के सुझावः
च्यवनप्राश एक ऐसा रसायन है जो प्रसिद्ध तो केवल इम्यूनिटी के लिए है। इसके सेवन से हृदय की मांसपेशियां भी बलवान बनती है।
वेगों/ को न रोकें। आयुर्वेद में आंसू को रोकने से हृदय रोग होना ऐसा सीधा वर्णन मिलता है। यही कारण है कि पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में हार्ट अटैक कम देखने को मिलता है।
खान पान की बात करें तो भोजन में खटाई या टमाटर की जगह अनारदाना और आंवले का चूर्ण नियमित सेवन करने से से हृदय रोगों से बचाव किया जा सकता है







