हल्द्वानी के बेस अस्पताल की बदहाली पर सांसद अजय भट्ट ने जताई चिंता, संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा पत्र

सीटी स्कैन मशीन तीन साल से बंद, ऑपरेशन थिएटर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं; अस्पताल परिसर में गंदगी और अनुपयोगी मेडिकल उपकरणों पर उठाए सवाल
हल्द्वानी:- हल्द्वानी स्थित सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने अस्पताल में चिकित्सा उपकरणों की अनुपलब्धता, निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, स्वच्छता व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र सौंपा है। पत्र में संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।
सांसद अजय भट्ट ने सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिए पत्र में उल्लेख किया है कि क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान बेस अस्पताल का स्थलीय निरीक्षण करने पर वहां की व्यवस्थाएं असंतोषजनक और चिंताजनक पाई गईं। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल नैनीताल जनपद के साथ-साथ कुमाऊं मंडल के पर्वतीय और तराई क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए एक प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है। ऐसे में यहां की व्यवस्थाओं में कमी का सीधा असर मरीजों के उपचार पर पड़ता है।

तीन वर्षों से बंद सीटी स्कैन मशीन पर जताई चिंता
पत्र के अनुसार, अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन पिछले लगभग तीन वर्षों से बंद पड़ी है। सांसद ने उल्लेख किया कि संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा मशीन की जांच कर उसे निष्प्रयोज्य घोषित किए जाने के बावजूद नई मशीन की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते मरीजों को जांच के लिए दूसरे सरकारी या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
उन्होंने अस्पताल में लगी पुरानी एक्स-रे मशीन के बार-बार खराब होने का मुद्दा भी उठाया। पत्र में कहा गया है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सांसद ने अस्पताल में तत्काल नई सीटी स्कैन मशीन और उच्च गुणवत्ता वाली एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई है।
ऑपरेशन थिएटर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने का मुद्दा
अजय भट्ट ने पत्र में अस्पताल के तीन ऑपरेशन थिएटरों में से एक के लगभग तीन वर्षों से बंद होने का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, संबंधित ऑपरेशन थिएटर में ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था नहीं होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, भुगतान की वैधता और औचित्य की समीक्षा करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, आवश्यक व्यवस्था कर ऑपरेशन थिएटर को जल्द चालू कराने पर जोर दिया है।
अस्पताल परिसर में गंदगी और अनुपयोगी मेडिकल सामग्री पर सवाल
पत्र में अस्पताल के तीसरे तल पर स्थित भवन और परिसर की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। सांसद के अनुसार, वहां बड़े-बड़े कूड़े के ढेर लगे हुए थे। कोविड-19 महामारी के दौरान इस्तेमाल की गई पीपीई किट और अन्य अनुपयोगी चिकित्सा उपकरण भी जमा पाए गए।
उन्होंने परिसर में दुर्गंध, गंदगी और कचरे के अनुचित प्रबंधन को गंभीर मामला बताते हुए अस्पताल प्रशासन से स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट के नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
अस्पताल के पास रखे लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट पर भी चिंता
सांसद ने कोविड-19 महामारी के दौरान कतर से लाए गए लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट का मुद्दा भी उठाया है। पत्र के मुताबिक, इस प्लांट को अस्पताल की इमारतों के बीच स्थापित किया गया है, लेकिन इसका उपयोग अब तक नहीं किया गया है।
उन्होंने प्लांट को आबादी से सुरक्षित दूरी पर रखने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि यदि इसका उपयोग नहीं हो रहा है, तो इसे ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां इसकी जरूरत हो। पत्र में संभावित सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग
सांसद अजय भट्ट ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए बेस अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं, निर्माण कार्यों, स्वच्छता व्यवस्था, चिकित्सा उपकरणों और सुरक्षा संबंधी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश के स्वास्थ्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
अब देखना होगा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार, बंद चिकित्सा सुविधाओं को चालू कराने और उठाए गए सवालों की जांच के संबंध में शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।









