उत्तराखंड: यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में 24 गुना तक वृद्धि, मात्र 6 माह में 3 लाख से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण


देहरादून:- सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। यूसीसी के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर आम लोगों में जागरूकता देखने को मिली है।

आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना में प्रतिदिन होने वाले विवाह पंजीकरण की औसत संख्या में 24 गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह ऐतिहासिक निर्णय सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यूसीसी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों -विशेषकर महिलाओं- को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही विवाह की न्यूनतम आयु, तलाक की प्रक्रिया और बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर समान और सख्त प्रावधान किए गए हैं।
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह माह में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण दर्ज किए गए। जबकि वर्ष 2010 में लागू पुराने अधिनियम के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 64 विवाह पंजीकरण ही हो पाए थे। पुराने कानून के तहत जहां प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, अवसर और सम्मान देने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विवाह पंजीकरण में आई उल्लेखनीय वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि जनता ने इस कानून को सामाजिक सुधार के रूप में स्वीकार किया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड का यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।









