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भारतीय घरों में प्रयोग की जाने वाली मेहंदी के फायदे: बार-बार होने वाले आँखों के गम्भीर रोग यूवाइटिस से मेहंदी (हिना) कर सकती है बचाव

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हल्द्वानी:- बदलती जीवन शैली और अनियमित खानपान के चलते लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रोग से ग्रस्त है। आयुर्वेद के अनुसार हर रोग निर्माण के पीछे अनेक कारण होते हैं, जिसमें  जीवन शैली, आहार, व्यसन, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विष इत्यादि सभी की भूमिका होती है।

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आज हमने मुखानी स्थित विश्व प्रांगण आयुर्वेदिक एवं पंचकर्म चिकित्सालय के नाड़ी वैद्य डॉ. राहुल गुप्ता बातचीत की तो उन्होंने आंखों में होने वाले रोग और मेहंदी के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में आंखों में होने वाले Uveitis (यूवाइटिस) को मुख्य रूप से ‘अधिमंथ’ या ‘दृष्टिगत रोग’ के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है। इसमें विशेष रूप से रक्तज और पित्तज दोष की प्रधानता रहती है।

दोषों का विवरण और कारण

पित्त दोषः आंखों में लालिमा (redness), जलन और सूजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। रक्त दोषः पित्त के साथ मिलकर यह आंखों की गंभीर सूजन और दृष्टि में धुंधलेपन का कारण बनता है जिससे आँखों की रोशनी भी जाना सम्भव है।

डॉ राहुल ने कहा कि सिर पर लगाए जाने वाले किसी भी तरह के अप्राकृतिक / रासायनिक द्रव्यों का प्रयोग आँखों के गम्भीर रोग uveitis के बार-बार होने में एक प्रमुख कारण हो सकता है। आधुनिक रिसर्च के अनुसार हेयर डाई इत्यादि में मौजूद अमोनिया और PPD (पैरा-फेनिलीनडायमाइन) जैसे केमिकल्स आंखों में जलन, सूजन और एलर्जी और यूवाइटिस (Uveitis) का कारण बन सकते हैं।

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अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही ऑटोइम्यून समस्या है, तो डाई से होने वाला गंभीर एलर्जिक रिएक्शन शरीर के इम्यून सिस्टम को उत्तेजित कर सकता है, जो परोक्ष रूप से आंखों की आंतरिक सूजन को ट्रिगर कर सकता है। यह रसायन आयुर्वेद दृष्टिकोण से विष समान कार्य कर Uveitis (यूवाइटिस) का कारण बनता है।

जब रोग का कारण सिर यानी “कपाल” पर लगने वाला रसायन हो तो उसके उपचार के लिए उसी स्थान का प्रयोग कर रोग को रोकने के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मेहंदी (मदयंतिका) के लाभकारी गुणों का वर्णन मुख्य रूप से इसके शीत वीर्य (Cooling nature) और रक्तशोधक (Blood purifier) के संदर्भ में मिलता है। आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ भावप्रकाश निघंटु में मेहंदी (मदयंतिका) के विष-नाशक और कुष्ठ-नाशक गुणों का स्पष्ट वर्णन मिलता है।

प्रमुख श्लोकः इस प्रकार है

“मदयंतिका लघु रूक्षा कषाय तिक्त शीतला। कफपित्तप्रशमनी कुष्ठघ्नी सा विषप्रणुत्॥”

अर्थ और व्याख्या देखें:

■ विषप्रणुत् (Toxicology): यह शरीर से विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने और उनके प्रभाव को शांत करने में सक्षम है।
■ कफपित्तप्रशमनीः यह शरीर में बढ़े हुए कफ और पित्त दोष को संतुलित करती है, जिससे रक्त कीअशुद्धि दूर होती है।
■ कुष्ठघ्नीः त्वचा संबंधी गंभीर रोगों और घावों को भरने के लिए इसे रामबाण माना गया है।

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मेहंदी का नियमित प्रयोग न केवल आपके बालों के लिए अच्छा है अपितु इसके शीत, रक्त शोधक और विष नाशक गुण के चलते यह नेत्र के गम्भीर रोग Uveitis (यूवाइटिस) फ्लेयर-अप / recurrence को रोकने में भी सक्षम है।

मेहंदी रसायन / chemical जन्य पालित्य (allopecia) में भी लाभकरक है और कुछ समय के उपयोग में ही सिर पर बाल उगना शुरू हो जाते हैं।

विशेष सावधानी – हर्बल / आयुर्वेद के नाम पर कई कम्पनियाँ पैकिज्ड मेहंदी (हिना) में रसायनों का प्रयोग करती हैं इसलिए, मेहंदी (हिना) के सूखे पत्तों को घर लाकर फिर उसका पाउडर बना कर प्रयोग में लाएँ। मेहंदी बनाते समय इसमें दही, अंडा इत्यादि सामग्रियों का प्रयोग करने से बचें अन्यथा इसका विष नाशक और रक्त शोधक गुण बाधित होगा।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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