काठगोदाम-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम रोपवे प्रोजेक्ट के सम्बन्ध में प्रमुख सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित, कैंची धाम तक जुड़ेगा रोपवे, काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक 14.9 किमी लंबा होगा रोपवे

हल्द्वानी:- काठगोदाम से हनुमानगढ़ी और कैंची धाम रोपवे प्रोजेक्ट को गति देने हेतु प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुधवार को सर्किट हाउस, काठगोदाम में आयोजित की गई।
बैठक में सचिव लोक निर्माण विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं आयुष विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय तथा सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्बयाल ने भी प्रतिभाग किया।
बैठक में राज्य के महत्वपूर्ण रोपवे प्रोजेक्ट पर चर्चा के दौरान निर्णय लिया गया कि काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे से कनेक्ट किया जाएगा। इस रोपवे योजना से देशभर से कैंची धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा। साथ ही काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज भी बनाया जाएगा, ताकि लोग आसानी से रोपवे स्टेशन तक पहुंच सकें।

काठगोदाम और आसपास वाहन पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी, ताकि बाहर सेआने वाले पर्यटक अपने वाहनों को पार्क कर रोपवे के माध्यम से आगे जा सकें। प्रोजेक्ट का तकनीकी अध्ययन पूर्ण होने के पश्चात ही कार्य आगे बढ़ाया जाएगा, क्योंकि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।
बैठक में प्रोजेक्ट मैनेजर, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एन.एच.एल.एम.एल.) ने बताया कि काठगोदाम-नैनीताल रोपवे लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। इस रोपवे में काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट एवं हनुमानगढ़ी स्टेशन बनेंगे। रोपवे की कुल लंबाई 14.9 किलोमीटर होगी, जिसमें 58 टावर लगेंगे। उन्होंने बताया कि रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक रोपवे का एकतरफा शुल्क 375 रुपये प्रति व्यक्ति प्रस्तावित है। रोपवे के माध्यम से प्रति घंटे लगभग 1800 (अठारह सौ) यात्री सफर कर सकेंगे तथा रानीबाग से हनुमानगढ़ी का सफर लगभग 20 से 25 मिनट में पूर्ण होगा।
प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि हनुमानगढ़ी रोपवे स्टेशन पर अत्यधिक ट्रैफिक न हो, इसके लिए समुचित प्लान तैयार किया जाए। रानीबाग में बनने वाले रोपवे स्टेशन के स्थलीय निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि वहां 33 एकड़ भूमि रिक्त पड़ी है। रानीबाग स्टेशन पर पार्किंग भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ज्योलीकोट रोपवे स्टेशन को जंक्शन स्टेशन बनाया जाएगा, जहां से कैंची धाम हेतु रोपवे बनाया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में वन विभाग की भूमि ट्रांसफर होनी है, उसका कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए।
प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एन.एच.एल.एम.एल.) एवं अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ इस कार्य को तेजी से आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि रोपवे बनने से हल्द्वानी, काठगोदाम एवं रानीबाग के होटल व्यवसायियों को लाभ होगा तथा पर्यटकों को सुगम एवं सुचारू सुविधा मिलेगी। रोपवे के निर्माण से नैनीताल शहर को ट्रैफिक, पार्किंग आदि समस्याओं से निजात मिलेगी।
रोपवे निर्माण से ये होंगे संभावित प्रमुख लाभ
यात्रा समय में बड़ी कमी पहाड़ी सड़क के घुमावदार मार्ग के बजाय रोपवे सीधा हवाई मार्ग अपनाएगा, जिससे काठगोदाम से नैनीताल क्षेत्र की आवाजाही तेज हो सकती है। रोपवे की यही विशेषता कठिन पहाड़ी भूभाग में समय बचाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नैनीताल की सड़क पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा
पर्यटन सीजन, वीकेंड और छुट्टियों में काठगोदाम-हल्द्वानी से नैनीताल जाने वाली सड़क पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ता है। वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन मिलने से सड़क 3 यातायात और पार्किंग का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन का बड़ा प्रोत्साहन
काठगोदाम रेलवे स्टेशन से आने वाले पर्यटकों को रोपवे के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्र तक अलग परिवहन विकल्प मिलेगा। इससे नैनीताल के साथ आसपास के पर्यटन स्थलों को भी लाभ मिलने की संभावना है। केंद्र सरकार भी रोपवे को पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने वाला माध्यम मानती है।
स्थानीय कारोबार को फायदा
निर्माण के दौरान तथा बाद में संचालन, टिकटिंग, तकनीकी रखरखाव, सुरक्षा, पार्किंग, खानपान और पर्यटन सेवाओं में रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
टैक्सी, होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, दुकानदार, गाइड और अन्य पर्यटन व्यवसायों में यात्रियों की आवाजाही बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
सड़क निर्माण की तुलना में कम भूमि की आवश्यकता रोपवे में सड़क की तरह पूरे पहाड़ी मार्ग को काटकर चौड़ा करने की आवश्यकता नहीं होती।
ईंधन और प्रदूषण में कमी की संभावना
यदि बड़ी संख्या में पर्यटक निजी कारों के बजाय रोपवे का इस्तेमाल करते हैं तो सड़क पर वाहनों की संख्या, ईंधन खपत और वाहन उत्सर्जन कम हो सकते हैं।
बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर (एन.एच.एल.एम.एल.) प्रशांत जैन, उपजिलाधिकारी मोनिका के साथ ही लोक निर्माण विभाग, विद्युत, वन, सिंचाई आदि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।









