फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक” का चिकित्सकों ने किया विरोध, डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाने और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप, रिलीज पर रोक लगाने की मांग

हल्द्वानी:- आने वाली फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ विवादों में घिर गई है। चिकित्सा पेशेवर इस फिल्म को लेकर बहुत ही नाराज हैं उन्होंने इस फिल्म के रिलीज होने के पर रोक लगाने की मांग की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने फिल्म के प्रचार सामग्री में डॉक्टरों को भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाने और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराए जाने की आशंका पर चिंता व्यक्त की है।

आईएमए हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ पंकज महेश का कहना है कि बॉलीवुड हमेशा कई विषयों पर फिल्म बनाता है, लेकिन चिकित्सा पेशेवर इस फिल्म ‘सूर्या अंत से आरंभ तक’को लेकर बहुत परेशान और नाराज हैं। इस फिल्म में चिकित्सा पेशेवरों को खलनायक के रूप में दिखाया गया है और यह फिल्म चिकित्सा जगत के खिलाफ है।
हम आई.एम.ए. हल्द्वानी शाखा के सदस्य इस फिल्म की कड़ी निंदा करते हैं। हम भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्री माननीय अश्विनी वैष्णव से आग्रह करते हैं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और चिकित्सा पेशेवरों तथा मरीजों के हित में इस फिल्म के रिलीज पर रोक लगाई जाए।

वही आई.एम.ए सचिव डॉ दीपक अग्रवाल का कहना है कि फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ की प्रचार सामग्री को लेकर हाल ही में उठी चिंताएं गंभीरता से विचार किए जाने योग्य हैं
उन्होंने कहा कि हम रचनात्मक स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं और मानते हैं कि सिनेमा में कठिन प्रश्न उठाने की क्षमता होती है।
चिकित्सकों का मानना है कि अस्पतालों में पहले से ही स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। ऐसे में हिंसा को उचित ठहराने वाला चित्रण डॉक्टरों की सुरक्षा, सम्मान और मरीजों के साथ उनके संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
एसोसिएशन ने इस तरह के चित्रण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ लोगों की गलतियों के लिए पूरे चिकित्सा समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
सिनेमा को संस्थाओं पर सवाल उठाने, गलत कार्यों को उजागर करने और कठिन कहानियाँ प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता है। समाज को उन लोगों का निष्पक्ष चित्रण भी देखने को मिलना चाहिए, जो अपना पूरा जीवन मरीजों की सेवा में समर्पित कर देते हैं।
भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यों के प्रति जवाबदेही
भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए और न ही उनका बचाव किया जाना चाहिए। जहाँ भी गलत कार्य होते हैं, वहाँ निष्पक्ष जाँच, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालाँकि, कुछ लोगों के गलत कार्यों के कारण पूरे चिकित्सा पेशे को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकांश कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में अथक परिश्रम करते हैं और मरीजों की जान बचाने के लिए अपना महत्त्वपूर्ण योगदान भी देते हैं। डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को निष्पक्ष जाँच, पेशेवर सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार मिलना चाहिए।
जनता के विश्वास को करें मजबूत
हम फिल्म निर्माताओं और समाज से आग्रह करते हैं कि वे ऐसी कहानियों को अपनाएँ जो साहसी होने के साथ-साथ जिम्मेदार भी हों। ऐसी कहानियाँ प्रस्तुत की जानी चाहिए जो जनता के विश्वास को मजबूत करें, न कि उन लोगों की सुरक्षा को कमजोर करें जो दिन-रात मेहनत करके दूसरों का उपचार करके उनकी जान बचाते हैं।










