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चारधाम यात्रा: केवल 23 दिनों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 11 लाख के पार, यात्रा के लिए मौसम बना चुनौती

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देहरादून:-  उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस वर्ष सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। यात्रा शुरू होने के महज 23 दिनों के भीतर ही दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 11 लाख के पार पहुंच गया है। यह तेजी न सिर्फ आस्था का प्रमाण है, बल्कि प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भी बनती जा रही है।

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केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम इस समय श्रद्धालुओं के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। यहां प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। सुबह तड़के से ही लंबी कतारें लग जाती हैं और देर शाम तक दर्शन का सिलसिला जारी रहता है।
चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुआ था। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलते ही इस बार यात्रा ने रफ्तार पकड़ ली और लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है।

इस बार यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती मौसम बना हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे धामों में कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। फिसलन भरे रास्ते, ठंडी हवाएं और अचानक बदलता मौसम यात्रियों के लिए कठिनाई पैदा कर रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है।

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पर्यटन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 11 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं। इनमें केदारनाथ धाम में 4.50 लाख से ज्यादा, बदरीनाथ धाम में 2.70 लाख से अधिक, गंगोत्री धाम में 1.65 लाख और यमुनोत्री धाम में 1.69 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं।

सबसे अहम संकेत पंजीकरण के आंकड़ों से मिल रहा है।

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यात्रा के लिए अब तक 32.75 लाख से अधिक लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि आने वाले दिनों में धामों में भीड़ और बढ़ेगी। इससे यातायात, ठहराव, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ना तय है।
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, मेडिकल टीम, आपदा प्रबंधन इकाइयों और ट्रैफिक कंट्रोल की व्यवस्था की है। साथ ही यात्रियों को मौसम के प्रति सतर्क रहने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

चारधाम यात्रा में उमड़ रही भीड़ एक बार फिर यह संदेश दे रही है कि आस्था के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। हालांकि, अब असली परीक्षा प्रशासन की है- इस बढ़ती भीड़ के बीच यात्रा को सुरक्षित, सुचारू और व्यवस्थित रख पाना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य है।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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