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बढ़ते प्रदूषण के चलते “एलर्जिक राइनाइटिस” आज एक आम समस्या: स्थायी समाधान, होम्योपैथी चिकित्सा एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार

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हल्द्वानी:- लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के कारण आज ‘एलर्जिक राइनाइटिस’ (Allergic Rhinitis) एक आम समस्या बन गई है।  जहाँ अन्य दवाएं इस रोग के लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देती हैं, वहीं होम्योपैथी चिकित्सा इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है।

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इस संबंध में हमने कमालुआगांजा रोड निकट हनुमान मंदिर कुसुमखेड़ा में स्थित डॉ रावत होम्यो हेल्थ सेंटर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ एसडीएस रावत से एलर्जिक समस्याओं के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि एलर्जिक राइनाइटिस आज एक आम समस्या बन गई है और इसके लक्षण आमतौर पर किसी एलर्जन (जैसे धूल, पराग या पालतू जानवरों के बाल) के संपर्क में आने के तुरंत बाद शुरू हो जाते हैं। 

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मुख्य लक्षण:

● लगातार छींकें आना: खासकर सुबह के समय या धूल-मिट्टी के संपर्क में आने पर।
● नाक बहना या बंद होना: नाक से साफ पानी जैसा तरल निकलना या नाक का भारीपन महसूस होना।
● आंखों में समस्या: आंखों में खुजली होना, लाल होना या लगातार पानी आना।
● खुजली: नाक, गले और कान के अंदरूनी हिस्से में खुजली महसूस होना।
● खांसी: गले में खराश या बलगम गिरने (Post-nasal drip) के कारण सूखी खांसी होना।
अन्य सहायक लक्षण:
● थकान: अच्छी नींद न आने के कारण दिनभर सुस्ती महसूस होना।
● सिरदर्द: नाक बंद होने के कारण साइनस के हिस्से में भारीपन और दर्द।
● आंखों के नीचे काले घेरे: जिन्हें ‘एलर्जिक शाइनर्स’ भी कहा जाता है।
● सूंघने की शक्ति कम होना: नाक में सूजन के कारण गंध का कम पता चलना।

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कब बढ़ जाता है?

यह मौसम बदलने पर (पराग कणों के कारण), पालतू जानवरों के पास जाने पर, या घर की सफाई (धूल-मिट्टी) के दौरान अधिक गंभीर
हो सकता है।

दबाने के बजाय जड़ पर प्रहार:

डॉ रावत कहते हैं होम्योपैथी का मुख्य उद्देश्य केवल लक्षणों को रोकना नहीं, बल्कि शरीर की एलर्जी के प्रति संवेदनशीलता को कम करना है। इससे न केवल एलर्जी की गंभीरता घटती है, बल्कि भविष्य में इसके बार-बार होने की संभावना भी कम हो जाती है।

समानता का सिद्धांत:
होम्योपैथी “समानता” के सिद्धांत पर काम करती है। इसमें रोगी को ऐसी सूक्ष्म दवाएं दी जाती हैं जो स्वस्थ व्यक्ति में वैसे ही लक्षण पैदा करती हैं
जैसे रोगी महसूस कर रहा हो।

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व्यक्तिगत उपचार की महत्ता:

होम्योपैथी में उपचार पूरी तरह से व्यक्तिगत होता है। एक विशेषज्ञ चिकित्सक केवल शारीरिक लक्षणों को ही नहीं, बल्कि रोगी की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को भी ध्यान में रखता है।

चिकित्सक इसमें स्राव का प्रकार, समय, एलर्जी शुरू होने के कारण और व्यक्ति का स्वभाव—इन सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही सटीक दवा का चुनाव करते है।

जीवन की गुणवत्ता में सुधार:

नियमित होम्योपैथिक उपचार से न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Resilience) बढ़ती है, बल्कि एलर्जी के प्रति प्रतिक्रिया भी धीमी पड़ जाती है। लंबे समय में होम्योपैथी उपचार पद्धति रोगी के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार लाने और उसे दवाओं पर निर्भरता से मुक्ति दिलाने में कारगर होती है।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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