निजी स्कूलों पर जिला प्रशासन ने की सख्ती: अभिभावकों से अतिरिक्त वसूली गई राशि को 1 जुलाई से फीस में करना होगा समायोजित, मनमानी शुल्क वृद्धि को माना जाएगा नियमों का उल्लंघन


नैनीताल:- जिले में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूले जाने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सबसे अहम आदेश यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि को 1 जुलाई से फीस में समायोजित करना होगा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अलावा प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य मदों में मनमाने ढंग से अतिरिक्त धनराशि वसूल रहे थे। अब जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण खर्च के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त लिए जाने वाले अन्य शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में लिया जा सकेगा, जिसे न्यूनतम रखना होगा और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की स्वीकृति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासन ने फीस वृद्धि पर भी स्पष्ट सीमा तय कर दी है। राज्य सरकार द्वारा बोर्ड संबद्धता के लिए जारी एनओसी की शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इसके लिए भी पीटीए की स्वीकृति जरूरी होगी। मनमानी शुल्क वृद्धि को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
परीक्षा शुल्क को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यालय पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करेंगे। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही ली जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका और अन्य सामग्री की वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित होगा। किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं लिया जा सकेगा। वहीं, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) के लिए केवल एक रुपये शल्क निर्धारित किया गया है।
अभिभावकों को राहत देते हुए प्रशासन ने विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक शुल्क भुगतान का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा।
आदेश के अनुसार, यदि किसी विद्यालय ने सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में अतिरिक्त शुल्क वसूला है, तो उसकी राशि 1 जुलाई 2026 की फीस में समायोजित करनी होगी। यदि अतिरिक्त वसूली गई राशि जुलाई की फीस से अधिक है, तो शेष राशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर इस समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ आरटीई एक्ट के तहत एक लाख रुपये तथा सीबीएसई बायलॉज के तहत पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा विद्यालय की मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।










