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विदेशी स्विस नागरिक ने जताया आयुर्वेद पर विश्वास, 20 साल पुराने यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर से मिला छुटकारा

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हल्द्वानी:- बढ़ती उम्र में यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर यानी पेशाब की नली में संकुचन एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें पेशाब की नली में रुकावट आ जाती है, जिससे मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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शहर के मुखानी चौराहा स्थित श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सालय के नाड़ी वैद्य डॉ राहुल गुप्ता ने पेशाब से संबंधी बढ़ती समस्याओं और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर (मूत्र मार्ग का सिकुड़ना) बढ़ती उम्र का रोग है, इसमें पेशाब की नली संकुचित जाती है, और पेशाब में रुकावट की समस्या होने लगती है।  ऐसे में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की बात करें तो इसके लिए सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है। सर्जरी के बाद भी बार-बार यह बीमारी होने का खतरा बना रहता है। साथ ही, फॉलो-अप में मरीज को बार-बार पेशाब की नली में कैथेटर डालना पड़ता है जो बहुत दर्दनाक होता है, कभी-कभी ब्लीडिंग भी हो जाती है, और दर्द व जलन बनी रहती है।

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स्विट्जरलैंड निवासी 53 वर्षीय मरीज स्फाकियानाकिस इओनिस, जो एक नर्सिंग प्रोफेशनल हैं, पिछले लगभग 20 सालों से यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर की समस्या से जूझ रहे थे। उनकी इस बीमारी से सम्बंधित दो सर्जरी भी हो चुकी थीं जिनमे “इंटर्नल उरेथेरोटोमी” (स्विट्जरलैण्ड), व “ओपटिल्यूम डायलेटेशन” (जर्मनी) शामिल थी। लक्षणों की गम्भीरता को देख मरीज़ को इसके बाद पुनः तीसरी सर्जरी “ओपन यूरेथरो प्लासटी” की सलाह दी जा चुकी थी।

आधुनिक चिकित्सा से राहत न मिल पाने के कारण उन्होंने इंटर्नेट पर इसकी वैकल्पिक चिकित्सा को ढूढ़ने का मन बनाया। वहाँ उन्हें उत्तराखंड हल्द्वानी के नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता की वेबसाइट मिली जिसके पश्चात उन्होंने ऑनलाइन कंसल्टेशन लेकर इलाज करवाने का रास्ता चुना।

डॉ राहुल गुप्ता ने बताया कि यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर में उनकी आयुर्वेद दवाएं पेशाब के रास्ते संकुचन को ठीक करती हैं , यूरेथ्रा के प्रभावित भाग को प्राकृतिक तरीके से अंदर से ही रिपेयर करती हैं, और उसकी इलास्टिसिटी वापस लाती हैं, जो इसे काफ़ी प्रभावी इलाज बनाता है।

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आयुर्वेद पर बढ़े विश्वास के चलते मरीज़ ने वैद्य राहुल गुप्ता से एक वर्ष के इलाज के बाद पूर्ण स्वास्थ्य मिल जाने पर अपना वीडियो फ़ीड्बैक भी साझा किया है। इस इलाज के दौरान मरीज के प्रोस्टेट वॉल्यूम में भी काफी सुधार देखा गया। आपको बता दें कि वैद्य राहुल गुप्ता पिछले 20 सालों से दुनिया के 25 से अधिक देशों में अपनी चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, इसके साथ ही वे भारत सरकार द्वारा कुछ ख़ास आयुर्वेद चिकित्सकों के विशेष पैनल में भी शामिल हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मरीजों को भारत सरकार के “हील इन इंडिया कार्यक्रम” के तहत ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श प्रदान करने की अनुमति प्राप्त है।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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