प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की बढ़ाई चिंता, 49 मरीजों की पुष्टि, राजधानी देहरादून में सबसे अधिक 34 मामले

देहरादून:- प्रदेश में इंफ्लुएंजा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अब तक प्रदेश में 49 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से पांच संक्रमित मरीजों की मौत भी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मृतक मरीज पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। प्रदेश में सामने आए मामलों में सबसे अधिक 34 मरीज देहरादून के हैं।
मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और स्क्रीनिंग तेज कर दी है। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज के अनुसार, जहां से भी स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ रहे हैं, वहां रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय किया गया है। चार सदस्यीय टीमें संबंधित क्षेत्रों में पहुंचकर स्क्रीनिंग के साथ संक्रमण की स्थिति का जायजा ले रही हैं।
विभाग अब संक्रमित मरीजों की केवल चिकित्सकीय निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की कड़ी तलाशने में भी जुटा है। मरीज की पिछले 10 से 15 दिनों की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है। इसके साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी भी आवश्यकतानुसार एच1एन1 जांच कराई जा रही है।

देहरादून में मामलों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर ऐसे मरीजों पर ध्यान दिया जा रहा है, जो पहले से शुगर, रक्तचाप, हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं।
चिकित्सकों के अनुसार को-मॉर्बिड मरीजों में एच1एन1 संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने के कारण उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संक्रमण से हुई पांच मौतों के मामलों में भी मरीज को-मॉर्बिड स्थिति में थे।
एम्स ऋषिकेश के इंटरनल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार स्वाइन फ्लू के लक्षण शुरुआत में सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं। अचानक बुखार, ठंड लगना, खांसी, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, अत्यधिक थकान और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण सामने आने पर समय रहते चिकित्सकीय जांच और सलाह लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों को भी अलर्ट किया है। चिकित्सा संस्थानों में एच1एन1 से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और मरीजों की स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय स्तर पर संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के साथ अस्पतालों की तैयारियों की भी समीक्षा की जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय के अनुसार, इंफ्लुएंजा एच1एन1 से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर तैयार है। रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के साथ संक्रमित मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा रही है।










