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उत्तराखण्डहरिद्वार

निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हरिद्वार, हर की पौड़ी पर सुबह से ही भीड़, लोगों ने की विधि विधान से पूजा अर्चना, हर तरफ कीर्तन और मंत्रोच्चार की गूंज

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हरिद्वार:-  निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार श्रद्धा, भक्ति और सनातन आस्था के रंग में रंगी नजर आई। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालु हर की पौड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचने लगे। मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे दिन घाटों और मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही।

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निर्जला एकादशी को सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और उपवास करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण रहा कि उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे और गंगा स्नान कर अपनी आस्था प्रकट की।

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हर की पौड़ी पर सुबह से उमड़ी भीड़

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सूर्योदय से पहले ही हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। गंगा तट पर स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ किया और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की।

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कई श्रद्धालु परिवार सहित घाटों पर पहुंचे, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

श्रद्धालुओं ने जल, फल, वस्त्र और अन्य उपयोगी सामग्री का दान कर पुण्य अर्जित किया। घाटों पर जगह-जगह दान-पुण्य और धार्मिक आयोजनों का माहौल देखने को मिला।

निर्जला एकादशी के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में भी दिनभर भक्तों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना कर व्रत का संकल्प लिया। मंदिरों में आयोजित भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं को निर्जला एकादशी के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि यह व्रत आत्मसंयम, सेवा और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए दान और उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है।

घाटों पर गूंजते रहे भजन

पूरे दिन गंगा घाटों पर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कहीं विष्णु सहस्रनाम का पाठ हो रहा था तो कहीं भजन मंडलियां भगवान के भजनों का गायन कर रही थीं। श्रद्धालु मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। गंगा तट पर श्रद्धा और भक्ति का ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने धर्मनगरी के आध्यात्मिक स्वरूप को और अधिक जीवंत बना दिया।

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सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन की नजर

निर्जला एकादशी के अवसर पर उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। हर की पैड़ी सहित प्रमुख घाटों और मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यातायात व्यवस्था में भी विशेष प्रबंध किए गए थे। प्रमुख मार्गों पर पुलिस कर्मी तैनात रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। घाटों पर सफाई, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।

आस्था और परंपरा का स्वरूप बना हरिद्वार

निर्जला एकादशी के अवसर पर हरिद्वार एक बार फिर सनातन आस्था का केंद्र बनकर उभरा। गंगा स्नान, भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच धर्मनगरी में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने मां गंगा और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर परिवार, समाज और देश की खुशहाली की कामना की।

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Anand Batra

Editor-in-Chief - Hills News (www.hillsnews.in)

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