जिले की 17 विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी, महंगी किताबें को अनिवार्य कराने, और चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदारी करने को लेकर प्रशासन सख्त


हल्द्वानी:- जिले में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और अभिभावकों पर पड़ रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने हल्द्वानी, रामनगर और भीमताल क्षेत्र के 17 निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है। लंबे समय से अभिभावकों द्वारा महंगी किताबें अनिवार्य कराने और चुनिंदा दुकानों से खरीदारी के दबाव की शिकायतें मिल रही थीं, जिस पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
जांच में सामने आया है कि कई स्कूल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बजाय महंगे निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कई कक्षाओं में किताबों की संख्या जरूरत से दो से तीन गुना तक बढ़ा दी गई है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कुछ विद्यालय अभिभावकों को विशेष दुकानों या विक्रेताओं से ही किताबें और शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे थे। इसे प्रशासन ने सीधे तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यह कृत्य Right to Education Act 2009, CBSE के दिशा-निर्देशों और Consumer Protection Act 2019 का उल्लंघन है।
प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 दिन के भीतर अपनी बुक लिस्ट संशोधित करने, केवल आवश्यक और एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों को प्राथमिकता देने, किसी भी विशेष दुकान की अनिवार्यता समाप्त करने और स्कूल की वेबसाइट पर बुक लिस्ट व फीस संरचना सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यदि अतिरिक्त शुल्क वसूला गया है तो उसका समायोजन या रिफंड भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित विद्यालयों की मान्यता निलंबित या समाप्त भी की जा सकती है। इसके अलावा जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन ने 15 दिन बाद संयुक्त जांच समिति द्वारा निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।










